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बलिया : एनएसएस विशेष शिविर का शुभारंभ, छात्राओं ने स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता में निभाई अहम भूमिका

शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला महाविद्यालय में प्रथम दिवस की विविध गतिविधियाँ संपन्न

(ब्यूरो आजमगढ़)

बलिया, 24 मार्च।
शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला महाविद्यालय, बलिया में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ सोमवार को उत्साहपूर्वक किया गया, शिविर के प्रथम दिवस की गतिविधियाँ तीन सत्रों में संपन्न हुईं, जिनमें सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी संगोष्ठी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख रहे,

प्रातः सत्र की शुरुआत स्वयंसेविकाओं के पंजीकरण और उद्घाटन औपचारिकताओं से हुई, इसके पश्चात एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रजनी कांत तिवारी के नेतृत्व में पीटी अभ्यास कराया गया, छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान और पौधों को जल देने जैसी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया, नाश्ते में मिठी हलुआ और चाय स्वयंसेविकाओं द्वारा ही तैयार किया गया,

दोपहर सत्र में सामूहिक रूप से भोजन बनाकर चावल, दाल, सब्जी, पापड़ और सलाद का आनंद लिया गया। एक घंटे के विश्राम के बाद बौद्धिक सत्र की शुरुआत हुई, जो विश्व क्षय दिवस (World TB Day) को समर्पित रहा,

इस अवसर पर सेमिनार हॉल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें दुबहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से पधारे विशेषज्ञों — श्री अभिनव कुमार (STLS), श्री प्रेम जीत सागर (STS), मो. शकील (ST), श्री सुष्मित कुमार (LT), तथा श्री सुनील कुमार राय (ICTC) — ने क्षय रोग के कारण, लक्षण, उपचार एवं रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी,कार्यक्रम का संचालन टीबी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. विवेक कुमार सिंह ने किया, जबकि डॉ. चंडी प्रसाद पाण्डेय ने भी विषय पर अपने विचार रखे, कार्यक्रम में श्री मनीष पाठक जी की उपस्थिति रही साथ ही कार्यक्रम का समापन एन एस एस प्रभारी डॉ. रजनी कांत तिवारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ,

सांध्य सत्र में छात्राओं के बीच रस्साकशी और म्यूजिकल चेयर जैसी खेल प्रतियोगिताएँ कराई गईं, जिनमें छात्राओं ने जोश और उमंग के साथ भाग लिया,इसके उपरांत सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें समूह गीत, नृत्य, कविता पाठ और लघु नाटक प्रस्तुत किए गए, दिन की समस्त गतिविधियों की समीक्षा के बाद रात्रि भोजन में पूड़ी-सब्जी परोसी गई,

शिविर का प्रथम दिन न केवल छात्राओं के शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने की दिशा में भी एक सफल प्रयास सिद्ध हुआ।

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