भाजपा का ‘बूथ’ बवाल: सीनियर कार्यकर्ता अश्वनी पाल का इस्तीफा, पार्टी में मची अफरा-तफरी!
कानपुर | कार्यालय संवाददाता रवि शर्मा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सांगठनिक स्तर पर असंतोष की खबरें अब सतह पर आने लगी हैं। कानपुर के पनकी वार्ड-57 में पार्टी के वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ता अश्वनी पाल ने बूथ अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। अश्वनी पाल के इस अचानक उठाए गए कदम से पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया है और कयासों का बाजार गर्म है।
उपेक्षा का लगाया गंभीर आरोप
सूत्रों के अनुसार, अश्वनी पाल लंबे समय से पार्टी की कार्यप्रणाली और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी से क्षुब्ध थे। उन्होंने मंडल अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि बूथ संख्या का प्रभार किसी अन्य ‘कामकाजी’ कार्यकर्ता को सौंप दिया जाए। अश्वनी पाल का आरोप है कि संगठन के भीतर अब निष्ठावान और पुराने लड़ाकू कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘खास चहेतों’ को तरजीह दी जा रही है, जिससे जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में भारी निराशा है।
12 साल की सेवा, अब महसूस हो रही बेरुखी
इस्तीफे की घोषणा करते हुए अश्वनी पाल ने भावुक स्वर में कहा, “मैंने पिछले 12 वर्षों से पार्टी की मजबूती के लिए अपना जी-जान लगा दिया। हर छोटे-बड़े अभियान में सक्रिय रहा, लेकिन अब ऐसा महसूस होता है कि संगठन को मेरी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। मैं चाहता हूं कि अब किसी नए व्यक्ति को यह मौका मिले।”
2027 के समीकरणों पर पड़ सकता है


असर:
राजनीतिक विशेषज्ञों और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि अश्वनी पाल जैसे पुराने कार्यकर्ता की नाराजगी भाजपा के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं का इस तरह पद छोड़ना आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के समीकरण बिगाड़ सकता है। फिलहाल, पार्टी का कोई भी बड़ा पदाधिकारी इस विषय पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे अश्वनी पाल को मनाने की कोशिशें शुरू होने की चर्चा है।