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एम्स गोरखपुर में गर्भ के भीतर जीवन को नई उम्मीद: पहली बार इंट्रायूटेराइन ब्लड ट्रांसफ्यूजन से बचाई गई जन्मे शिशु की जान

दीनदयाल पाण्डेय
मंडल क्राइम ब्यूरो
गोरखपुर

गोरखपुर। All India Institute of Medical Sciences के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने मातृ एवं भ्रूण चिकित्सा (Maternal Fetal Medicine) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार गर्भ में पल रहे शिशु को गर्भ के भीतर ही रक्त चढ़ाकर उसकी जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। यह अत्याधुनिक प्रक्रिया इंट्रायूटेराइन ट्रांसफ्यूजन (Intrauterine Blood Transfusion) 10 मई 2026 को सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई। वर्तमान में माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों स्वस्थ हैं।

कुशीनगर जनपद की रहने वाली यह महिला चौथी बार गर्भवती थीं। लेकिन मातृत्व का सफर उनके लिए बेहद कठिन रहा। Rh Isoimmunization नामक गंभीर स्थिति के कारण उनकी पिछली गर्भावस्थाओं में गर्भस्थ शिशुओं की मृत्यु हो चुकी थी और अब तक उनकी कोई जीवित संतान नहीं थी। इस बार भी गर्भधारण उनके परिवार के लिए उम्मीद के साथ गहरी चिंता लेकर आया था।

जब उन्होंने All India Institute of Medical Sciences की एंटीनैटल ओपीडी में परामर्श लिया, विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच की। जांच में Indirect Coombs Test पॉजिटिव पाया गया और नियमित डॉप्लर अल्ट्रासाउंड निगरानी शुरू की गई। कुछ समय बाद जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस बार भी गर्भस्थ शिशु में गंभीर एनीमिया विकसित हो चुका है। शिशु के रक्त कण लगातार नष्ट हो रहे थे, जिससे हृदय विफलता और गर्भ में मृत्यु का खतरा उत्पन्न हो गया था।

अब तक ऐसी अत्याधुनिक सुविधा के लिए मरीजों को पूर्वी उत्तर प्रदेश से बाहर, निकटतम बड़े केंद्र जैसे Lucknow जाना पड़ता था।

जैसे किसी गंभीर एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को नस के माध्यम से रक्त चढ़ाकर जीवन बचाया जाता है, उसी प्रकार इस जटिल प्रक्रिया में गर्भ के भीतर पल रहे शिशु की नाल (Umbilical Cord) तक विशेष तकनीक की सहायता से पहुँचकर सीधे रक्त चढ़ाया गया। यह आधुनिक चिकित्सा का ऐसा अद्भुत उदाहरण है, जिसमें उस मरीज का इलाज किया गया जिसने अभी जन्म भी नहीं लिया है।

यह जटिल एवं जीवनरक्षक प्रक्रिया Dr. Preeti Bala Singh जो की maternal fetal medicine की नोडल एवं स्त्री प्रसूति रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर हैं, के द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान भ्रूण की हर धड़कन, रक्त प्रवाह और माँ की स्थिति पर विशेषज्ञ टीम की सतत निगरानी बनी रही। प्रक्रिया सफल रही और वह शिशु, जो गंभीर एनीमिया और संभावित हृदय विफलता के कारण गर्भ में जीवन खो सकता था, अब सुरक्षित है।

यह उपलब्धि संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल Prof. (Dr.) Vibha Dutta के मार्गदर्शन, विभागाध्यक्ष Prof. (Dr.) Shikha Seth के नेतृत्व तथा निर्देशन में संभव हो सकी।
आवश्यक रक्त उपलब्ध कराने में Dr. Saurabh Murti का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

उल्लेखनीय है कि All India Institute of Medical Sciences के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में इसी वर्ष Maternal–Fetal Medicine में दो वर्षीय Post Doctoral Fellowship (PDF) Course प्रारम्भ किया गया है, जो क्षेत्र में इस तरह का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कदम है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत हाल ही में Dr. Ram Rundala ने प्रशिक्षण प्रारम्भ किया है।

इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को सफल बनाने में SR Dr Ram Rundala, विभाग की senior residents, Junior Residents तथा Nursing Officers की समर्पित टीम ने भी चौबीसों घंटे सक्रिय भूमिका निभाई और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भ के भीतर अजन्मे शिशु का इलाज करना आधुनिक चिकित्सा का चमत्कार है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर निदेशक Prof. (Dr.) Vibha Dutta ने पूरे प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, फीटल मेडिसिन टीम, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग, रेजिडेंट चिकित्सकों तथा नर्सिंग टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूर्वांचल की माताओं और गर्भस्थ शिशुओं के लिए उन्नत एवं जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की नई दिशा भी है।
इस उपलब्धि के साथ एम्स गोरखपुर का
Maternal–Fetal Medicine Unit तेजी से उन्नत सेवाओं की ओर अग्रसर है और पूर्वांचल में जटिल गर्भावस्थाओं के उपचार के लिए एक उभरते Centre of Excellence के रूप में स्थापित हो रहा है।

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