जौनपुर प्रशासनिक जांच में खुली कोचिंग संस्थानों की पोल
संवाददाता अंकित दूबे

जौनपुर। लखनऊ में कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, लेकिन उससे सबक लेने की जरूरत सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है। जौनपुर में जिला प्रशासन द्वारा मंगलवार को की गई छापेमारी और जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में साफ संकेत दे रही है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो जौनपुर में भी लखनऊ जैसी भयावह घटना कभी भी हो सकती है।
मंगलवार सुबह अपर जिलाधिकारी परमानंद झा और मुख्य अग्निशमन अधिकारी राज प्रकाश राय के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने शहर के आठ कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। जांच में जो हालात सामने आए, उन्होंने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी। अधिकांश संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी मिली। कई जगह अग्निशमन यंत्र नहीं थे, कहीं बिजली के तार लटक रहे थे तो अधिकांश भवनों में आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं मिला।
सबसे गंभीर स्थिति उस भवन में देखने को मिली जहां नीचे के दो तल पर कपड़ों की दुकानें संचालित हो रही हैं और तीसरे तल पर कोचिंग संस्थान चल रहा है। भवन की सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि किसी भी आपात स्थिति में दर्जनों छात्रों का एक साथ बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। यदि आग लग जाए या भगदड़ मच जाए तो छात्रों और शिक्षकों की जान बचाना चुनौती बन जाएगा।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई संस्थान भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक भवनों में संचालित हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। अग्निशमन विभाग के मानकों का पालन किए बिना ही बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। यही वजह है कि प्रशासन अब इन संस्थानों को संभावित खतरे की श्रेणी में मान रहा है।
लखनऊ अग्निकांड के बाद शुरू हुई इस जांच ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर छात्रों की सुरक्षा को लेकर कोचिंग संचालक कितने गंभीर हैं। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले इन संस्थानों में यदि आग से बचाव और आपदा प्रबंधन की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है, तो हजारों छात्रों का भविष्य और जीवन दोनों जोखिम में हैं।
जिला प्रशासन ने खामियां मिलने वाले संस्थानों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि मानकों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की जांच ने एक बात तो साफ कर दी है—लखनऊ जैसी त्रासदी केवल राजधानी की समस्या नहीं है, जौनपुर भी ऐसे खतरे की जद में है। जरूरत है कि हादसा होने से पहले चेत जाया जाए, क्योंकि लापरवाही की कीमत मासूम छात्रों की जिंदगी से चुकानी पड़ सकती है।