दिल्ली मार्च से पहले देशव्यापी कार्रवाई पर CPDRS ने जताई चिंतामौलिक अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता की रक्षा की अपील
संवाददाता अंकित दूबे

बदलापुर, जौनपुर। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में कथित निवारक गिरफ्तारियों, सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों और विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कार्रवाई को लेकर सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेकुलरिज्म (CPDRS) ने गहरी चिंता जताई है।
संगठन के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रमोद कुमार शुक्ला मोनू ने जारी बयान में कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और राष्ट्रीय राजधानी में एकत्र होने के संवैधानिक अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 48 घंटों में कई राज्यों से दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ निवारक कार्रवाई तथा पुलिस गश्त बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
बयान में नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों से जुड़ी प्रमुख यात्री ट्रेनों को रद्द किए जाने तथा दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को बंद करने के अनुरोध का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि इस तरह की पाबंदियों से प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और इलाज के लिए यात्रा करने वाले मरीजों को भी परेशानी हो सकती है।
संविधान में मिले अधिकारों की रक्षा की मांग
प्रमोद कुमार शुक्ला ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(क) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 19(1)(ख) शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(घ) देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन की स्वतंत्रता से संबंधित है। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत व्यापक प्रतिबंधों और विरोध प्रदर्शन की अनुमति से कथित तौर पर मनमाने ढंग से इनकार किए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध को महत्वपूर्ण बताते हुए लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने की अपील की है