खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के हालिया आदेश (सं. FSDA
/2026-27/838) के तहत प्रदेश के सभी मेडिकल स्टोरों के लिए अपनी निजी वेबसाइट बनाकर साप्ताहिक स्टॉक और फार्मासिस्ट का

विवरण अपडेट करना अनिवार्य किया गया है।
ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हज़ारों छोटे मेडिकल स्टोर, जिनकी दैनिक बिक्री मात्र ₹100 से ₹500 तक है, उनके लिए निजी वेबसाइट बनाना और उसका रखरखाव करना अत्यंत भारी आर्थिक बोझ है। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और छोटे दुकानदारों की आजीविका पर संकट गहरा सकता है।
साथ ही, दवा कंपनियों द्वारा फॉर्मुलेशन बदलकर दवाओं को DPCO (दवा मूल्य नियंत्रण) से बाहर रखकर जनता पर अत्यधिक दामों का बोझ डाला जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी (@myogiadityanath / @UPGovt) से हमारी विनम्र माँगे:
1️⃣ निःशुल्क शासकीय पोर्टल/ऐप: निजी वेबसाइट बनाने के खर्च से राहत देते हुए शासन स्तर पर एक केंद्रीकृत व निःशुल्क पोर्टल या मोबाइल ऐप उपलब्ध कराया जाए।
2️⃣ निजी वेबसाइट के खर्च से छूट: छोटे दुकानदारों को अपनी निजी वेबसाइट बनाने के बजाय विभागीय पोर्टल का उपयोग करने की अनुमति मिले।
3️⃣ जनपद स्तर पर सहायता व प्रशिक्षण: Drug Inspector कार्यालय के माध्यम से दुकानदारों को स्टॉक अपडेट और पंजीकरण हेतु निःशुल्क सहायता प्रदान की जाए।
4️⃣ DPCO नियमों का कड़ाई से पालन: कॉम्बिनेशन बदलकर महंगे दामों पर बेची जा रही दवाओं पर रोक लगाई जाए और अनुचित ट्रेड मार्जिन पर कड़ा नियंत्रण हो।
उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार छोटे व्यवसायियों, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रदेश की आम जनता के हित में इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र राहत प्रदान करेगी।