“महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई”
जी न्यूज 7 अंकित दूबे


जौनपुर। आजादी आंदोलन के गैर समझौतावादी धारा के महान क्रांतिकारी व अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति के आह्वान पर 27 फरवरी 2026 को नगरपालिका परिषद टाउन हॉल मैदान जौनपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में राष्ट्रवादी नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिए।
वक्ताओं ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई सन् 1906 को मध्य प्रदेश की अलीराजपुर रियासत के भावरा ग्राम में हुआ था। आदिवासी बच्चों से दोस्ती कर बचपन में ही वे पक्के निशानेबाज बन गये थे। उस समय देश भर में अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ता ही जा रहा था। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने चन्द्रशेखर आजाद के मन में जबरदस्त उथल-पुथल पैदा कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के प्रभाव स्वरूप ब्रिटिश विरोधी आजादी आंदोलन में भाग लेने की उनकी इच्छा प्रबल हो उठी। सन् 1921 में जब असहयोग आंदोलन चल रहा था तब स्कूल कॉलेज छोड़कर भारी संख्या में छात्र और नौजवान इस आंदोलन में शामिल हो रहे थे। छात्र चंद्रशेखर आजाद भी सक्रिय वॉलंटियर के तौर पर शामिल हुए। फलस्वरूप वे गिरफ्तार हुए। अदालत में मजिस्ट्रेट के पूछे जाने पर उन्होंने अपना नाम “आजाद”, पिता का नाम “स्वाधीनता” और घर “जेलखाना” बताया। इन निडर उत्तरों से चिढ़कर मजिस्ट्रेट ने 15 वर्षीय चंद्रशेखर आजाद को 15 बेतों की सजा सुनाई। तभी से वे “आजाद” नाम से प्रसिद्ध हो गए।
इसके बाद चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारी गतिविधियों को तेज करने के लिए रामप्रसाद बिस्मिल व अशफाक उल्ला खान से मिलने शाहजहांपुर गये और एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी की भूमिका निभाने का संकल्प लिये। शीघ्र ही वे क्रांतिकारी संगठन- हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के नेता बने। HRA ने अपने विधान में भारत को पूर्ण स्वराज बनाना घोषित किया। जहां पर जाति, धर्म, संप्रदाय और वर्ग से ऊपर उठकर सभी के लिए समान अधिकार व समान अवसर के लिए संघर्ष करना लक्ष्य होगा। रूस में सन् 1917 में संपन्न हुई विश्व की प्रथम समाजवादी क्रांति का प्रभाव जैसे-जैसे दुनिया भर में बढ़ रहा था, तो भारत में भी वैज्ञानिक समाजवाद के विषय ने भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद को भी प्रभावित किया। उनका मानना था कि सिर्फ समाजवाद के रास्ते ही अमीर और गरीब के भेद मिटाकर जनता की सही मुक्ति लाई जा सकती है। इसीलिए राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के निर्माण के लिए सन् 1928 में फिरोजशाह कोटला, दिल्ली में क्रांतिकारियों ने “समाजवाद” को अपने दल का उद्देश्य घोषित किया और “समाजवादी” शब्द जोड़ते हुए संगठन का नया नाम “हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी” (HSRA) रखा और चंद्रशेखर आजाद को संगठन का कमांडर-इन-चीफ चुना।
27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश फौज से अकेले मुकाबला किया और कई अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया। काफी देर लड़ने के बाद बचने की कोई उम्मीद न देख आजाद ने आखिरी गोली अपने सिर में मार ली। और इस तरह गैर समझौतावादी धारा के एक महान क्रांतिकारी के जीवन का अंत हो गया। चंद्रशेखर आजाद ने कहा था-
“दुश्मन की गोलियों का सामना हम करेंगे,”
“आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।”
ऐसे महान चरित्रों की त्याग और कुर्बानी की कीमत पर हमें आजादी मिली। लेकिन आजादी का फल देश के एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग ने हड़प लिया। जनता की असली मुक्ति नहीं हासिल हुई। आज पूंजीवादी शोषण के अधिकाधिक तीव्र होने के चलते आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक क्षेत्रों में भारी संकट मौजूद है। देश की आजादी के 78 वर्षों के बाद भी भुखमरी, भिक्षावृत्ति, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, अपसंस्कृति, सांप्रदायिकता, धार्मिक उन्माद, महिला उत्पीड़न, शोषण-जुल्म, अन्याय-अत्याचार जैसे अनेकों समस्याओं का खात्मा न हो सका। देश भर में जन जीवन की समस्याओं से जूझ रही आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। ऐसी विषम परिस्थितियों में वर्तमान और आने वाली पीढ़ी में गैर समझौतावादी धारा के महान क्रांतिकारियों के गुणों को विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ताकि चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता- डाॅ. जी एल निषाद व संचालन- प्रमोद कुमार शुक्ल ने किया। श्रद्धांजलि सभा को अपूर्व दूबे, इन्दुकुमार शुक्ल, मोहित प्रजापति, दिलीप कुमार खरवार, संतोष कुमार प्रजापति, पूनम प्रजापति, , इत्यादि ने सम्बोधित किए सम्बोधित किए और अंजली सरोज व जिमी गुप्ता ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किया।
इस अवसर रत्नदीप शर्मा, मनोज विश्वकर्मा, अब्दुल्लाह तिवारी, शैलेंद्र कुमार, संजय सिंह, राजबहादुर विश्वकर्मा, डबलू सरोज, राकेश निषाद, विनोद मौर्य, योगेश द्विवेदी, विजयप्रकाश, आजाद गुप्ता, शिवप्रसाद विश्वकर्मा, रविन्द्र पटेल, प्रवीण शुक्ल, खुशबू, किरन, मालती देवी, डिम्पी, अवधेश निषाद, निलेश यादव, धीरज गुप्ता, देव, शिवकुमार, रवि, राहुल शर्मा, रामसिंगार दूबे, अशोक कुमार खरवार, शमीम अहमद, मनोज यादव, अनूप, आलोक जायसवाल, दीपक, शैलेष पाण्डेय, प्रियाशुं सिंह, सोनू मौर्य सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके की गई और समापन जोरदार नारों के साथ हुआ।