Uncategorized

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

दिनांक : 10.07.2023

गोरखपुर: भारत और विदेशों में बायोटेक्नोलॉजी की मांग लगातार बढ रही है। भारत मे बायोटेक्नोलाजी मे स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाई के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। गोरखपुर का दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय जैव प्रौद्योगिकी विभाग छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने का एक विशिष्ट केन्द्र बन चुका है। यह विभाग बायोटेक्नोलाजी के क्षेत्र में सर्वोत्तम मानव संसाधन तैयार करने की दृष्टि से 2000 में गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर मे स्थापित किया गया। अब तक छात्रों के 20 बैच उत्तीर्ण हो चुके हैं और बङी संख्या मे यहां के छात्र दुनिया के विभिन्न हिस्सों जैसे यूएसए, स्वीडन, यूके, स्पेन आदि में विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कई छात्र बायोटेक्नोलाजी के क्षेत्र मे उद्यमिता के क्षेत्र मे भी अपना योगदान दे रहे हैं। कुछ छात्रों की उनकी अपनी कंपनी भी है। दी द उ के बायोटेक्नोलाजी विभाग मे एम.एससी. की पढ़ाई और जैव प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. कार्यक्रम भी चलता है। जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पादप जैव प्रौद्योगिकी, पशु जैव प्रौद्योगिकी, माइक्रोबियल एंजाइम प्रौद्योगिकी, जैव सूचना विज्ञान, कार्यात्मक जीनोमिक्स आदि में पांच पूरी तरह कार्यशील प्रयोगशालाएं हैं। विभाग सभी बुनियादी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित है। विभाग में सात स्वतंत्र अनुसंधान प्रयोगशालाएँ, एम.एससी. एमएससी की जरूरतों को पूरा करने के लिए लैब, स्मार्ट क्लासरूम, कॉन्फ्रेंस हॉल, लाइब्रेरी उपलब्ध हैं। साथ ही बड़ी संख्या में छात्रों ने यूजीसी सीएसआईआर -जेआरएफ फेलोशिप, यूपी-एसएलईटी, डीआरडीओ, आईसीएमआर और अन्य योग्यताएं उत्तीर्ण की हैं। विभाग के कई छात्रों ने विदेशों में विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, चीन, फ्रांस, इज़राइल और कोरिया आदि देशों में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विभाग से बड़ी संख्या में छात्र हमारे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों/संस्थानों में वैज्ञानिक/संकाय के रूप में सेवा कर रहे हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के पास छात्रों के लिए विशेष रूप से जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों पर 1300 से अधिक पाठ्यपुस्तकों और संदर्भ पुस्तकों के साथ एक स्वतंत्र पुस्तकालय की सुविधा भी है।

विभाग के शिक्षकों ने कई फ़ेलोशिप प्राप्त की हैं और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इथियोपिया, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, ताइवान, स्वीडन, यूएसए, यूके आदि जैसे कई देशों का दौरा किया है। विभाग पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंधित समस्याओ जैसे फसल, जलजमाव, बाढ़, जापानी एन्सेफलाइटिस, एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम, डेंगू, कैंसर और मलेरिया जैसी बीमारियों के निदान की खोज मे अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button