राहत सामग्री वितरण के दौरान ग्रामीणों और पुलिस में झड़प,
संवाददाता, हनुमानगंज — सुनील कुमार,

राशन देने से मना करने को लेकर शुरू हुआ विवाद, बीच-बचाव करने पहुंची पुलिस से भी हुई धक्का-मुक्की
सालिकपुर/महदेवा, कुशीनगर। बाढ़ प्रभावित सालिकपुर और महदेवा क्षेत्र में राहत सामग्री वितरण के दौरान राशन देने से मना किए जाने को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान कुछ ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच भी झड़प और धक्का-मुक्की हो गई।
बताया गया कि राहत सामग्री वितरण के दौरान बबीता पत्नी अवधेश और उनके बेटे चंदन चौहान पुत्र अवधेश को राशन दिए जाने को लेकर विवाद हुआ। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति ने उन्हें राहत सामग्री देने से मना कर दिया, जिसके बाद कहासुनी बढ़ गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया।
इसी दौरान पुलिस और कुछ ग्रामीणों के बीच भी धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आरोप है कि ग्रामीणों की ओर से एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ा गया तथा खींचतान के दौरान उसका बिल्ला भी टूट गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा के साथ-साथ स्थिति को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।
वहीं, बबीता का आरोप है कि विवाद के दौरान पुलिस की ओर से उनके बेटे चंदन चौहान के साथ मारपीट की गई। उनका कहना है कि उनके बेटे को कमरे में बंद करके पीटा गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस की ओर से बताया गया कि राहत सामग्री वितरण के दौरान उत्पन्न विवाद को शांत कराने के लिए पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अलग कराया गया और शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया।घटना के दौरान पुलिस और ग्रामीण दोनों पक्षों की ओर से संयम बनाए रखना जरूरी है। यदि पुलिस की कार्रवाई को लेकर किसी ग्रामीण को शिकायत है तो उसकी जांच संबंधित अधिकारियों के स्तर पर होनी चाहिए। वहीं, राहत सामग्री वितरण के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की या सरकारी कार्य में बाधा डालने की स्थिति भी उचित नहीं है।बाढ़ जैसी आपदा के समय बड़ी संख्या में प्रभावित लोग राहत सामग्री के लिए एकत्र होते हैं। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री व्यवस्थित तरीके से पहुंचती रहे और किसी प्रकार का विवाद न हो।