83 वर्षों की गौरवशाली परंपरा: बारीगांव रामलीला मेले को मिले राजकीय मेले का दर्जामुख्यमंत्री, सांसद, पनियरा विधायक एवं जिलाधिकारी से संरक्षण और सहयोग की अपील
महराजगंज। घुघली थाना क्षेत्र के ग्राम बारीगांव में वर्ष 1943 से निरंतर आयोजित हो रहा श्रीरामलीला मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। स्वर्गीय पंडित भवानी कृष्ण त्रिपाठी एवं उनके साथियों के प्रयासों तथा समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से शुरू हुई यह परंपरा आज 83 वर्षों का गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है।
इस ऐतिहासिक मेले में रामलीला मंचन के साथ कबड्डी, दौड़, फुटबॉल, वॉलीबॉल सहित विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। यह मेला ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
अब समय है कि बारीगांव के इस ऐतिहासिक मेले को जनपद स्तर पर विशिष्ट पहचान मिले और इसे राजकीय मेले का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस पहल हो।
ग्रामवासियों की ओर से माननीय मुख्यमंत्री, महराजगंज के सांसद, पनियरा विधायक एवं जिलाधिकारी से विनम्र अपील है कि इस गौरवशाली परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करें। इससे मेले को नई पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां भी इस सांस्कृतिक धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ा सकेंगी।
आइए, बारीगांव की 83 वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने और इसे राजकीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए एकजुट होकर पहल करें।
यदि चाहें, तो इसे जनप्रतिनिधियों को सौंपे जाने वाले औपचारिक ज्ञापन या अखबार में प्रकाशित होने वाली जनहित अपील के रूप में भी तैयार किया जा सकता है।
घुघली समाचार
