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प्रायवेट स्कूल संचालकों की मनमानी, नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे स्कूल
निर्माणाधीन स्कूल में ही लगाई जा रही कक्षाएं

रिपोर्टर आशीष सिंह रजक

मासूम बच्चे धूल और नमी से परेशान
कण्डम वाहनों में ठूंस ठूंस कर भरे जाते है बच्चों को
कण्डम वाहन को प्राइमरी स्कूल के बच्चे धक्का लगाते हुआ वीडियो वायरल
सिलवानी। आए दिन स्कूल वाहनों में हो रहे हादसों के बाद भी प्रायवेट स्कूल संचालक अपने फायदे के लिए नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे है। प्रायवेट स्कूल संचालकों द्वारा शासन के सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूलों का संचालन कर रहे। ब्लाॅक मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में कई स्कूलों में छोटे-छोटे कमरों में मिडिल से लेकर हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित हो रहे। इन कमरों में ना ताजी हवा और धूप तक नहीं आती है। वहीं कमरों का साइज भी निर्धारण मापदंड से कम है। और बच्चों को खेल सामग्री तो दूर खेल मैदान भी नहीं है। और पालकों से प्रतिवर्ष खेल एवं अन्य मदों में भारी फीस वसूल की जाती है। बच्चों को घर से स्कूल लाने ले जाने के लिए भी पुराने जुगाड़ के कण्डम वाहनों को लगाया जाता है। जिससे कई बार वाहन रास्तें में ही खराब हो जाते है। और मासूम बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर नगर के बरेली रोड स्थित संस्कार बैली स्कूल का शुक्रवार को वायरल हुआ था। गत दिनों ब्लाक के एक प्रायवेट स्कूल का वाहन भी दुर्घटना का शिकार हुआ था जिसमें कई बच्चों को चोटें आई थी घटना के बाद एसडीएम की उपस्थिति में तहसील कार्यालय में प्रायवेट स्कूल संचालकों की बैठक सम्पन्न हुई थी जिसमें एसडीएम ने सभी स्कूल संचालकों को अपने विद्यालय के वाहनों को अपडेट रखने के निर्देश दिये थे। इसके बावजूद भी नगर के एक स्कूल का वाहन को प्रायमरी स्कूल के बच्चे धक्का देते नजर आने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
घटना शुक्रवार की दोपहर उदयपुरा रोड की बताई जा रही है। जब स्कूल के बच्चे छुट्टी होने पर अपने घर जा रहे थे तो स्कूल का वाहन क्रमांक एमपी 49 बीबी 1468 कंडम होने पर प्रायमरी क्लास के बच्चे स्वयं ही धक्का लगा रहे थे। नियमानुसार स्कूल वाहन में पीले कलर और टेक्सी कोटे का परिवहन विभाग में पंजीयन होना चाहिए। परंतु प्रशासन के नियमों को बलाए ताक में रखकर कम लागत में अधिक मुनाफे के फेर में संचालक नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है। नियमानुसार स्कूल वाहन में बैग रखने का स्थान एवं सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए परंतु स्कूल संचालकों द्वारा टेम्पो टेक्सी, मैजिक जैसे वाहनों में बच्चों को ठूंस ठूंस कर भरा जाता है। स्कूल वाहनों पर स्कूल का नाम एवं स्कूल का फोन या मोबाइल नंबर दर्ज होना चाहिए। कुछ स्कूल वाहनों में वाहन नम्बर तक नहीं लिखा गया है।
संस्कार बैली स्कूल जिस भवन में संचालित हो रहा है वह अभी निर्माणाधीन है जिसमें नर्सरी कक्षा के नौनिहाल मासूम लेकर हाईस्कूल के बच्चों को निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट की धूल एवं रेत की डस्ट और तराई का नमी का सामना करना पड़ता है। जो कि नौनिहालों के स्वस्थ से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। नियमानुसार स्कूल भवन में दिव्यांग बच्चों को रेम्प होना चाहिये। इनका कहना… ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नरेश रघुवंशी का कहना है कि मिडिया के मध्यम से जानकारी प्राप्त हुईं हैं मैं दिखवा लेता हूं।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी एम.एल. राठौरिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आप स्कूल की अनियमिततायें लिखकर और फोटो वाटसएप पर डाल दीजिये जांच कराकर कार्यवाही की जाएगी।

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