क्या बिहार में कांग्रेस की स्थिति हो जायेगी पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसी?
कांग्रेस बिहार में कमजोर नहीं, राहुल और खड़गे को अपने बिल पावर और कॉन्फिडेंस को रखना होगा मजबूत!
ज़ी न्यूज़ 7 आशीष सिंह पत्रकार
यदि बिहार में कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को नहीं बदला तो, क्या बिहार में भी कांग्रेस की स्थिति पश्चिम बंगाल और दिल्ली की तरह हो जाएगी? पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में एक या दो सीट मिली थी, और दिल्ली में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी!
गत दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी 2025 विधानसभा विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर और सक्रिय हुए! उन्होंने एक के बाद एक बिहार के लगातार तीन दौरे किए और बिहार में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण फेसले लिए! बिहार में तीन बड़े बदलाव किए! राहुल गांधी की बिहार को लेकर गंभीरता और सक्रियता और बिहार कांग्रेस में किए गए बड़े बदलाव के कारण बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में कांग्रेस के प्रति जोश और सक्रियता नजर आई! लगने लगा कि कांग्रेस बिहार में अपने दम पर 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार के अंदर बड़ा उलट फेर कर सकती है! राहुल गांधी की बिहार में गंभीरता और सक्रियता ने अपने घरों में कुंठित और निराश होकर बैठे कार्यकर्ताओं में जोश भरा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को लंबे समय बाद कांग्रेस के लिए सड़कों पर संघर्ष करते हुए देखा गया!
लेकिन कार्यकर्ताओं का यह जोश तब ठंडा पड़ता नजर आया, जब कांग्रेस के नेताओं ने राजद के नेताओं के साथ लगातार दिल्ली और पटना में दो बैठक की! इन बैठकों का असर यह हुआ कि कांग्रेस के जो कार्यकर्ता उत्साहित होकर जोश के साथ अपने घरों से निकले थे! वह कार्यकर्ता निराश होकर वापस कुंठित होकर अपने घरों में जाकर बैठ गए! इसकी झलक 20 अप्रैल को उस समय दिखाई दी जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, की रैली में भीड़ ही नही जुटी! जबकि खड़गे की जनसभा से पहले, कन्हैया कुमार की पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा में जन सैलाब देखा गया! मगर यह जन सैलाब, कांग्रेस और राजद की बैठक के बाद अचानक कहां गायब हो गया! इस पर कांग्रेस हाई कमान को बड़ा चिंतन और मंथन करना होगा!
मैंने मल्लिका अर्जुन खरगे की 20 अप्रैल को होने वाली बिहार यात्रा से 2 दिन पहले अपने ब्लॉग में लिखा था कि, कांग्रेस और राजद की बैठक के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ गया है और कांग्रेस के कार्यकर्ता कुंठित और नाराज होकर अपने घरों में जाकर बैठ गए हैं! इसकी झलक 20 अप्रैल को मल्लिका अर्जुन खड़गे की जनसभा में देखने को मिली!
बिहार को लेकर कांग्रेस के नेताओं में खासकर राहुल गांधी और मल्लिका अर्जुन खड़गे में या तो, बिल पावर का अभाव है या कॉन्फिडेंस नहीं है! क्योंकि जो माहौल राहुल गांधी बिहार के लगातार तीन दौरे कर और बिहार कांग्रेस में तीन बड़े बदलाव कर जो माहौल बिहार में बनाया था! उस माहौल को राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव के साथ दिल्ली में बैठक कर समाप्त कर दिया? कांग्रेस को यह समझना होगा कि बिहार में कांग्रेस कमजोर नहीं है! यदि कांग्रेस बिहार में कमजोर होती तो, कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव में तीन लोकसभा सीट जीतने का अवसर नहीं मिलता और ना ही गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 19 सीट जीतने को नहीं मिलती! बिहार में कांग्रेस की जीत की असल वजह कांग्रेस का कार्यकर्ता ही है! इस जीत में राजद और तेजस्वी यादव का कोई बड़ा योगदान नहीं है! सबसे पहले कांग्रेस के नेताओं को यह भ्रम निकालना होगा!
यदि कांग्रेस बिहार में राजद के कारण जिंदा है तो, कांग्रेस को बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव में तीन से अधिक सीट जितने को मिलती और 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 में से कम से कम 40 सीट जीतती! 2020 और 2024 में हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव के पहले 2015 में 29 विधानसभा सीट मिली थी और लोकसभा चुनाव 2019 में राजद का सफाया हो गया था! लेकिन कांग्रेस को एक लोकसभा सीट पर जीत मिली थी! इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कांग्रेस बिहार में कमजोर नहीं है! इसलिए राहुल गांधी और मल्लिका अर्जुन खड़गे को अपना बिल पावर और कॉन्फिडेंस को मजबूत रखना होगा! अभी भी वक्त है कांग्रेस बिहार में एक बार अपने दम पर चुनाव लड़कर देखें और यदि समझौता करना ही है तो, बड़े दल से नहीं बल्कि, बिहार के छोटे-छोटे दलों से समझौता करें!
देवेंद्र यादव वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक कोटा, राजस्थान