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कुशीनगर।नगरपालिका क्षेत्र वार्ड नंबर 6, बाबा साहब आप्टे नगर में 22 अगस्त 2025 को घटित एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। योगेंद्र कुशवाहा और उनके बेटे राजकुमार कुशवाहा तथा सोनू कुशवाहा को एक छोटे से जमीन विवाद में कुशीनगर चौकी बुलाया गया था। ग़ौर करने वाली बात यह है कि विवाद का आपसी सुलह पहले ही हो चुका था, लेकिन चौकी पर पहुँचने के बाद हालात अचानक बदल गए।

आरोप है कि चौकी इंचार्ज गौरव शुक्ला के आदेश पर सिपाही शिवविलास मिश्रा और अजय कुमार ने तीनों को एक कमरे में बंद कर दिया और पट्टे से इतनी बेरहमी से पीटा कि वे बेहोश होकर गिर पड़े। पीड़ितों का कहना है कि जब तक उनकी सांसें चल रही थीं, तब तक उन्हें पीटा जाता रहा। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें 151 की कार्यवाही में चालान कर दिया गया।

यह घटना पुलिस ज्यादती का ताज़ा उदाहरण है, जिसने स्थानीय लोगों में आक्रोश फैला दिया है। सवाल यह है कि जब विवाद का सुलह हो चुका था, तो फिर निर्दोष लोगों को इस तरह बर्बरता का शिकार क्यों बनाया गया? क्या कानून-व्यवस्था इसी तरह आम लोगों को डराने और दबाने के लिए है?

पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और कहा है कि अगर उन्हें इंसाफ़ नहीं मिला तो वे उच्च अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग तक आवाज़ उठाएंगे। यह मामला सिर्फ़ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे कुशीनगर की न्याय व्यवस्था पर करारा सवाल है।

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