काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति की ओर से आयोजित हुई बाइक जूलूस व जन सभा
जी न्यूज 7 अंकित दूबे

जौनपुर। शाहगंज
आजादी आन्दोलन के गैर समझौतावादी धारा के महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती – 23 जनवरी के अवसर पर काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति जौनपुर के आह्वान पर 11 जनवरी से 25 जनवरी तक पाक्षिक कार्यक्रम के तहत आज दिनांक 18 जनवरी 2026 को बदलापुर से शाहगंज तक एक बाइक जुलूस निकाला गया। इसके बाद शाहगंज के बड़ा गांव में जन सभा हुई। जिसमें काफी संख्या में छात्र नौजवानों ने भाग लिया।
जन सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन कठिन संघर्षों से भरा रहा। वे बचपन में अपने घर के पास रास्ते में रोजाना एक बूढ़ी मां को भीख मांगते देखकर द्रवित जाते और अपने स्कूल का टिफिन प्रतिदिन दे देते और सोचा करते कि कब हमारे समाज से इस तरह की गैर बराबरी खत्म होगी। दूसरी घटना, जो उन्हें प्रभावित किया, वह थी महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस की सबसे कम उम्र में फांसी। इसके अलावा आस-पास हो रहे अन्याय-अत्याचार देखकर उनके मन में अंग्रेजों के प्रति नफरत पैदा हो गई। उन्होंने कहा था- “झूठ और अन्याय के साथ समझौता करना जघन्यतम अपराध है।” इस तरह राजनैतिक संघर्ष में जब वे 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये, तो उन्होंने आह्वान किया कि “हमारा पहला लक्ष्य है पूर्ण स्वराज्य हासिल करना और उसके बाद भारत में समाजवाद कायम करना।” इसीलिए उन्होंने कहा था- “मैं अपने बचपन में अंग्रेजों को देश से खदेड़ देना ही सबसे बड़ा कर्त्तव्य समझता था। लेकिन बाद में सोचकर देखा कि अंग्रेजों को खदेड़ देने मात्र से ही हमारे कर्त्तव्य समाप्त नहीं हो जायेंगे। भारत में नयी समाज व्यवस्था लागू करने के लिए एक और क्रांति की जरूरत होगी।”
लेकिन आजादी के 78 वर्षों के बाद भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस सहित हमारे देश के तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों का सपना पूरा नहीं हुआ। आज भी बूढ़ी मां स्वरूप महिलाएं बेसहारा बनकर भीख मांगने पर मजबूर हैं। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। महंगाई चरम पर है। शिक्षा व रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। समाज में नैतिक पतन व गुण्डागर्दी व्याप्त है। साम्प्रदायिकता व धार्मिक उन्माद बढ़ रहा है। लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इस तरह शोषण व अन्याय पर आधारित व्यवस्था कायम है और चंद पूंजीपति देश के मालिक बन बैठे हैं। परिणामस्वरुप आम जनता त्राहि त्राहि कर रही है। इसलिए आज समय की मांग है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन संघर्षों से सीख लेकर उनके क्रांतिकारी विचारों के आधार पर लोगों को संगठित करें और जन समस्याओं के खिलाफ संघर्ष तेज करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता- श्री इन्द्रपति सिंह और संचालन- दिलीप कुमार खरवार ने किया। कार्यक्रम को प्रमोद कुमार शुक्ल, इन्दुकुमार शुक्ल, मिथिलेश कुमार मौर्य, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, राजेश कुमार सिंह, अपूर्व कुमार दुबे व संतोष कुमार प्रजापति ने सम्बोधित किए। अंजली सरोज, जिमी गुप्ता, सृष्टि, सौम्या, मृष्टि, आस्था ने क्रांतिकारी व देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर मीता गुप्ता, पूनम प्रजापति, शिवभवन सिंह, राजबहादुर विश्वकर्मा, राकेश निषाद, विनोद मौर्य, प्रवीण सिंह, विजयप्रकाश गुप्त, इदरीश, रहमान, देवव्रत निषाद, संजय सिंह, प्रभाकर मौर्य, नन्हकूराम, सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।