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शासन-प्रशासन की सख्ती के चलते जंगलों के रास्ते रेत का परिवहन कर रहे रेत माफिया ,वन विभाग की मूक सहमति के चलते दिन रात जंगल मार्गों का किया जा रहा है इस्तेमाल

आशीष सिंह रजक बरेली से

बरेली । क्षेत्र में रेत माफियाओं के द्वारा प्रशासन की कि जाने वाली कार्यवाही के चलते मुख्य मार्ग को छोड़ अभ्यारण क्षेत्र के मार्ग से रेत के वाहनों का आवागमन किया जा रहा है ।बता दें कि क्षेत्र की नर्मदा रेत खदानों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ट्रैक्टर ट्राली संचालकों के द्वारा रेत का अवैध उत्खनन कार परिवहन किया जा रहा है जिसको लेकर आए दिन राजस्व एवं खनिज विभाग के द्वारा कार्यवाही की जा रही है। बावजूद बालू माफियाओं के द्वारा अपनी हरकतों से बाज ना आते हुए अब वर्तमान में मुख्य मार्ग का इस्तेमाल ना करते हुए जंगली मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि ट्रैक्टर ट्राली संचालकों के द्वारा नगर से देहगांव , रायसेन और विदिशा जाने के दौरान बम्होरी से देहगांव , बरेली से चैनपुर रंमगडा पाली डूंगरिया होते हुए भरतीपुर मार्ग से अपने वाहनों का परिवहन किया जा रहा है तो साथ ही सुल्तानपुर से ईटखेड़ी कंजईघाना होते हुए जंगल ही जंगल खनन माफिया दिन रात इन मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। रेत के होने वाले अवैध परिवहन को लेकर जहां एक ओर खनिज विभाग के द्वारा कार्यवाही की जा रही है तो वही खनन माफियाओं के द्वारा चोरी के नए-नए रास्ते निकाले जा रहे हैं। स्थिति में सरकार को प्रतिमाह लायल्टी की चोरी के रूप में नुकसान हो रहा है बता दें कि इश्क होने वाले रेत के अवैध परिवहन से जहां सरकार को नुकसान हो रहा है वही जगलों से होने वाले परिवहन के कारण जंगली जानवरों और
नए पैदा होने वाले पौधों को नुकसान हो रहा है । आग का बना रहता है खतरा –वर्तमान में गर्मी का मौसम प्रारंभ हो गया है ऐसी स्थिति में जंगलों से वाहनों के आवागमन के कारण जहां साइलेंसर से निकलने वाली चिंगारी और ड्राइवरों के द्वारा किए जाने वाले धूम्रपान से जंगलों में आग लगने का खतरा भी बना हुआ है।यह जरूरी है कि अवैध परिवहन के साथ-साथ जंगलों में होने वाली आगजनी की घटना को रोकने के लिए जंगलों से होने वाले अवैध परिवहन को जल्द से जल्द रोका जाए। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों से हो रहा परिवहन –बता दें कि सरकार के द्वारा ट्रैक्टर ट्राली पर लायल्टी चालू कर दी है ऐसी स्थिति में क्षेत्र में रेत की कीमत में बढ़ोतरी देखी जा रही है इसी का फायदा उठाते हुए ट्रैक्टर संचालकों के द्वारा चोरी के नए-नए हथकंडे अपनाते हुए लेकिन नर्मदा से रेत भरकर शार्टकट जोखिम भरा रास्ता चैनपुर से भरतीपुर,साँतरा ,ईटखेड़ी होते हुए सीधे सुल्तानपुर से बाहर निकल रहे हैं। बता दें कि वन मार्ग से निकलने के दौरान ट्रैक्टर ट्राली संचालकों को कई बन चौकी पार करना पड़ती हैं। बावजूद इसके वन विभाग के द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा रही।

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