Uncategorized

यूपी में सातवां चरणः जहां 2019 में पूरी तरह अस्त हो गया था समाजवाद का ‘सूरज

यूपी में सातवां चरणः जहां 2019 में पूरी तरह अस्त हो गया था समाजवाद का ‘सूरज’
13 सीटों में से 4 पर बसपा तो 2 पर सपा का कभी नहीं खुला खाता
संजय सक्सेना, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में पूर्वांचल की 13 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इस 7वें चरण में देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिये सबसे हाई प्रोफाइल सीट समझी जाने वाली वाराणसी लोकसभा सीट भी शामिल है। यहां से पूरे देश में बीजेपी को 400 सीट दिलाने का दम भरने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मैदान में हैं। इसी चरण में सूबे के सीएम और सबसे कद्दावर नेताओं में से एक आदित्यनाथ योगी के गढ़ गोरखपुर में भी मतदान होना है।

जिन 13 सीटों पर पहली जून को मतदान होना है, उसमें से छहः सीटें ऐसी हैं जिस पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का कभी भी खाता नहीं खुल पाया है। इसमें विशेष रूप से वाराणसी की भी सीट शामिल है। वाराणसी के अलावा कुशीनगर में सपा-बसपा को कभी खाता नहीं खुला है तो वहीं महराजगंज, गोरखपुर, बलिया और बांसगांव में बसपा कभी भी जीत नहीं पाई है। 7वें चरण की 13 सीटों पर 2019 के लोकसभा चुनाव में 9 सीटों पर बीजेपी, 2—2 सीटों पर अपना दल और बसपा को जीत हासिल हुई थीं। सपा का यहां खाता भी नहीं खुल पाया था। अबकी बार 7वें चरण में महिला प्रत्याशियों की संख्या काफी कम है। मात्र 10 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी हैं। अभी तक के 6 चरणों के चुनाव के मुकाबले सातवें चरण में महिला उम्मीदवारों की संख्या सबसे कम है।
वाराणसी लोकसभा सीट के स्वभाव की बात की जाय तो यहां कांग्रेस और भाजपा का मुकाबला बराबरी का रहा है।दोनों ने सात-सात बार सीट दर्ज की है। जनता पार्टी, जनता दल और सीपीआईएम को भी यहां से एक-एक बार जी मिली है। पिछले 3 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी जीतती आई है। यहां से सपा-बसपा को कभी भी जीत नहीं हासिल हुई है। इसी श्रेणी मे कुशीनगर सीट भी आती है। यह सीट 2008 के बाद अस्तिव में आई थी। पहला लोकसभा चुनाव 2009 में हुआ था जो कांग्रेस ने जीता थ। उसके पश्चात पिछले दो लोकसभा चुनावों से यक सीट भाजपा के कब्जे में है। यहां से भी सपा-बसपा का कभी खाता नहीं खुल पाया है।
इसके अलावा 7वें चरण की 4 सीट ऐसी हैं जहां से बसपा को कभी भी जीत हासिल नहीं हो पाई है। इस श्रेणी मंे महाराजगंजग, गोरखपुर, बलिया और बांसगांव की सीट आती हैं। महाराजगंज लोकसभा सीट पर अब तक भाजपा का कब्जा रहा है। भाजपा ने यहां से 6 बार तो कांग्रेस ने 5 बार जीत हासिल की है। वहीं 3 बार निर्दलीय और इसके अलावा यहां से जनता पार्टी, जनता दल और सपा को एक-एक बार ही जीत हासिल हो पाई है।
कभी योगी आदित्यनाथ के गुरू और राजनेता महंत अवैद्यनाथ जो गोरखनाथ मन्दिर के तत्कालीन पीठाधीश्वर का सियासी दबदबा था, गोरखपुर लोकसभा से चौथी लोकसभा के लिये हिंदू महासभा से सर्वप्रथम निर्वाचित हुए थे। इसके बाद नौवीं, दसवीं एवं ग्यारहवीं लोकसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। गोरखपुर में भाजपा ने 8 बार जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 बार यहां से सांसद रह चुके हैं। एक बार उपचुनाव में यह सीट सपा के खाते में भी जा चुकी है तो एक बार यहां से जनता पार्टी को भी जीत हासिल हुई थी। फिलहाल यहां से भाजपा के रवि किशन सांसद हैं। यहां भी बसपा का कभी भी खाता नहीं खुला है। बसपा के लिये यहां भी हमेशा सियासी सूखा रहा।
समाजवाद का गढ़ और पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की जन्मस्थली रही बलिया की लोकसभा सीट पर सबसे पहले पहला चुनाव सोशलिस्ट पार्टी ही जीती थी। जनता पार्टी और जनता दल ने भी एक-एक बार जीत हासिल की थी। इसके पश्चात चन्द्रशेखर जी यहां से 5 बार सांसद चुने गये। 2008 के उप चुनाव और 2009 के आम चुनाव मंे यहां से सपा के टिकट से पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को जीत हासिल हुई थी। भाजपा यहां पिछले दो बार से ही चुनाव जीत रही है। वीरेद्र मस्त यहां से बीजेपी के सांसद हैं। बसपा को यहां कभी जीत हासिल नहीं हुई।
बांसगांव लोकसभा सीट पर भी बसपा का कभी खाता नहीं खुल पाया है। यहां से भाजपा और कांग्रेस दोनों 6-6 बार जीत चुके हैं। जनता पार्टी और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी एक-एक बार चुनाव जीत चुकी है। 1996 में यहां से सपा की सुभावती चौहान चुनाव जीतने में सफल रही थीं। 2009 से यहां भाजपा का कब्जा है और कमलेश पासवान लगातार 3 बार के सांसद हैं।
वहीं 7वें चरण का चुनाव लड़ रहे 144 उम्मीदवारों के चाल चरित्र चेहरे की बात की जाय तो 36 उम्मीदवारों पर आपराधिक व 30 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सबसे ज्यादा 22 आपराधिक मामले बसपा की टिकट पर बलिया से चुनाव लड़ रहे लल्लन सिंह यादव पर दर्ज हैं जबकि वाराणसी से चुनाव लड़ रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पर 18 और कुशीनगर से राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी से चुनाव लड़ रहे स्वामी प्रसाद मौर्या पर 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार बहुजन समाज पार्टी के 13 में से 5, भाजपा के 10 में से 3, सपा के 9 में से 7, सरदार पटेल सिद्धांत पार्टी 6 में से 2, कांग्रेस के 4 में से 2 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। साथ ही बहुजन समाज पार्टी के 5, भाजपा के 1, सपा के 6, कांग्रेस के 2 उम्मीदवारों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स के अनुसार 7वें चरण में महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चन्दौली, वाराणसी, मिर्ज़ापुर और राबर्ट्सगंज से लड़ रहे 144 उम्मीदवारों में केवल 10 महिला उम्मीदवार हैं। इस चरण में 55 करोड़पति उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 10 में से 10, सपा 9 में 9, कांग्रेस के 4 में 4, बसपा के 13 में से 7, अपना दल (सोने लाल) के 2 में से 2, अपना दल (कमेरावादी) के 2 में से 2 उम्मीदवार करोड़पति हैं। घोसी से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजीव राय सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। इनकी संपत्ति लगभग 49 करोड़ के है। वहीं गोरखपुर से भाजपा से चुनाव लड़ रहे फिल्म अभिनेता व भाजपा नेता रवि किशन (रवीन्द्र शुक्ला) की संपत्ति 43 करोड़ है। तीसरे नंबर पर महाराजगंज से भाजपा के उम्मीदवार पंकज चौधरी हैं जिनकी संपत्ति 41 करोड है। वहीं सबसे कम सम्पति वाले उम्मीदवारों में गोरखपुर से अलहिन्द पार्टी से चुनाव लड़ रहे राम प्रसाद की कुल संपत्ति 25,000 रुपये हैं। दूसरे नंबर पर चंदौली से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे संतोष कुमार की संपत्ति 38,000 और तीसरे नंबर पर महाराजगंज से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रामप्रीत की संपत्ति 50,000 रुपये है।
पढ़ाई-लिखाई की बात की जाय तो 144 में से 54 उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता 5वीं और 12वीं के बीच है जबकि 82 उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता स्नातक और इससे ज़्यादा है। 3 उम्मीदवार डिप्लोमा धारक हैं। वहीं 4 उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता साक्षर है। 7वें चरण में 25 से 40 आयु वर्ष के बीच के 47 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं जबकि 41 से 60 आयु वर्ष के 69 उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं 28 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी आयु 61 से 80 वर्ष के बीच है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button