अपनी दुर्दशा पर रोता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण गोरखपुर
दुर्दशा के मुख्य बिन्दु
कुल एरिया 58 एकड़ जमीन
1-प्राइवेट दुकान जैसे मिठाई, कार जीप का सर्विस गैराज, जूता चप्पल की दुकान ,रिसेल वाहन सेन्टर, आवासों पर रिक्शा ठेला वालों का कब्जा कर रखा है
2-कुछ समय पूर्व तक जहां बच्चों की क्लास चलती हैं वहाँ शुद्ध जल की कोई व्यवस्था नहीं हैं।
3-बी यस ए और प्राचार्य ऑफिस मैं पानी का जो कूलर लगा है वह भी पीने योग्य नहीं है।अक्सर वह भी खराब पड़ा रहता है।
4-कुछ समय पूर्व तक कई सालों से बन्द पड़े कार्यक्रमओ मैं सरकार से प्राप्त धन का खर्चा न करना छूटी रिपोर्ट पर यनसीआर्टी द्वारा कर्मचारियों का 6 महीना तक वेत्तन रोकने के बाद मजबूरन 26 $ 27 को कुछ साहित्य मैंला ,सांस्कृतिक मेला कराया गया ,जिसमें गोरखपुर डायट से संबंधित अन्य विद्यालयओ से भी कुछ इनडायरेक्टली आर्थिक सहयोग भी लिया गया वह भी अलिखत रूप से।
5-काफी समय से प्राचार्य पद का खाली रहना।
6-कुछ वर्ष पूर्व तक अधिकतर अध्यापकों पर खासतौर पर पुरूष अध्यापकों पर डायट के जिम्मेदार अधिकारियों का विशेष कृपा होना वह भी किसी स्तर पर जाकर
7- कुछ वर्ष पूर्व तक डायट के अध्यापकों द्वारा आंतरिक अंको के देने के पावर का छात्रों से जमकर ब्लैक मेल के रूप मैं स्तेमाल करना।
7-कुछ समय पूर्व तक अध्यापकों का क्लास न पड़ा कर दिन भर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का बटरिंग करनाऔर
8-कुछ समय पूर्व तक अध्यापकों का बाकी समय मैं छात्रों के अंदर एक दूसरे के प्रति विरुद्ध गुटबाजी करना।
9-कुछ समय पूर्व परअधिकतर अध्यापकों का व्यवहारिक अयोग्य होना।
10-कुछ पूर्व तक ह्यूमन यन जी ओ का पढ़ाने से अधिक बच्चों को आंतरिक अंको मैं सम्बन्धित टीचरो से मिलकर ब्लैक मेल करना।
11-कुछ समय पूर्व तक स्वयं अपने कभी क्लास नहीं पढ़ाते हैं डायट के अध्यापक और केवल अटेंडेंस लगा कर दिन भर वरिष्ठ प्रवक्ता के कार्यालय के पास घूमते रहते हैं।
12-बाकी दिन जो भी अधिकारी आते हैं उनको केवल प्राथमिक के शिक्षकों के विरुद्ध भड़काने का कार्य करते हैं डायट के कुछ पुराने अध्यापक कुछ वर्ष पूर्व तक।
मेरे सामने एक बार डायट के एक पूर्व अधिकारी जब शिक्षक संघ के एक पदाधिकारी गए थे उन्होंने कहा कि आप लोग विद्यालय में पढ़ाई के गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास करें। अन्य बहुत कुछ बातें उन्होंने कही। परंतु प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष बड़े भैया राजेश दुबे जी ने इतना दमदार जवाब दिया कि वह चुप हो गए। उन्होंने कहा कि हम अपने विद्यालय पर पूरा ध्यान देते हैं समय से सारी गतिविधियां कराते हैं और जब चाहे आप आकर हमारे विद्यालय का अवलोकन कर सकते हैं। उनके जवाब से संबंधित अधिकारी निरुत्तर हो गए।
माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व पदाधिकारी दिग्विजय नाथ पांडेय जी और वर्तमान में जिला अध्यक्ष श्याम नारायण सिंह वहां के कर्मचारियों के अध्यापकों के वेतन और अन्य मामले को लगातार संबंधित अज्ञात अधिकारियों के संज्ञान में ले आते रहते हैं और उनकी आवाज को उठाते रहते हैं परंतु वहां के संबंधित कर्मचारियों द्वारा कुछ लोगों को छोड़ दिया था बाकी लोग अपेक्षाकृत कम जोड़ते हैं।
उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री राजेश श्रीवास्तव वहां के कर्मचारियों को वेतन के लिए लगातार धरना प्रदर्शन करते रहते हैं और हर पटल पर उनके मामले को उछाल ते रहते हैं। परंतु कुछ लोगों को छोड़ दिया जाए बाकी अधिकतर लोग वेट और वाद सिस्टम के आधार पर कार्य करते हैं और उनका सहयोग भी कम करते हैं
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान का इतिहास
डायट के पूर्व यह संस्थान ‘मुंशी प्रेमचन्द जूनियर टीचर संस्थान नार्मल’ ( जे टी सी )के नाम से कार्यरत था।
नई शिक्षा नीति 1986 के योजनान्तर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गयी। संकल्पना को मूर्त रुप देने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के नाम से संस्थान आकार लेने लगा। उसी क्रम में गोरखपुर जनपद में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पूर्व में संचालित हो रहे बी.टी.सी. (जे.टी.सी. जो अब बंद हो गया है) । यह अब डी यल यड हो गया है।1904 के निर्मित भवन में प्रारंभ होना सुनिशिचत हुआ। ज्ञातव्य है कि यह संस्थान प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्र ‘नार्मन’ (अपभ्रस नार्मल) के नाम से संचालित होता था। जहां पुरूष एवं महिला छात्रा-अध्यापक प्रशिक्षण प्राप्त करते थे। क्रियात्मक प्रशिक्षण हेतु ‘माडल स्कूल’ भी था। पुरूष प्रशिक्षु ‘नार्मन’ तथा महिला प्रशिक्षु ‘दीक्षा’ विधालय में प्रशिक्षण प्राप्त करती थी। यहां पर पुरूष एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, मेस की उत्तम व्यवस्था थी । पूर्व में संस्थान में छात्रावास (अब जीर्ण हो गया है), पुस्तकालय, गृह विज्ञान – प्रयोगशाला, विज्ञान प्रयोगशाला तथा संज्ञान-सहगामी विकास हेतु संसाध्न उपलब्ध् थे।
20 वीं शताब्दी के पुर्वाहः में विकसित भवनों में ही डायट गोरखपुर एवं उसके सात अनुभाग संचालित हुए। इनमें दो प्रशिक्षण हाल, पुस्तकालय, प्राचार्य, उपप्राचार्य कक्ष तथा कार्यालय संचालित हुए। नये भवन के नाम पर प्रशासनिक भवन 1993-94 में हस्तगत कराया गया, जिसे डायट गोरखपुर का प्रारंभ माना जा सकता है। संस्थान में प्राथमिक पूर्व माध्यमिक शिक्षकों का शिक्षण-प्रशिक्षण के अनेको कार्य संचालित होते रहे / हो रहे है। संस्थान बी.टी.सी. (200 सीट) दो वर्षीय (आवासीय), उर्दू बी.टी.सी. (राज्य सरकार द्वारा नियोजित), विशिष्ट बी.टी.सी. (आवश्यकता के क्रम में), तथा विविध् सेवा पूर्व / सेवारत शिक्षकों का प्रशिक्षण, पाठयक्रम समीक्षा एवं विकास, module विकास, पुस्तकों की समीक्षा तथा नवचारी अधिगम, उपचारात्मक शिक्षण, टी.एल.एम. / एस.एल.एम. इत्यादि पर प्रशिक्षण एवं साहित्य का विकास होता आ रहा है। संस्थान से प्राथमिक / उच्च प्राथमिक शिक्षकों के टी.एम.एल., प्रभावी कक्षा शिक्षण, उपचारात्मक शिक्षण, आवश्यकता आधारित, विज्ञान, भाषा गणित तथा सामाजिक विषय, मूल्यांकन, तनावमुक्त शिक्षा उपागम जैसे अनेकों पुस्तक / माडयूल का प्रकाश हुआ है। संस्थान शिक्षकों को अभिपे्ररित करने हेतु दो शिक्षा जर्नल ‘प्रभा’ एवं ‘शिक्षक संवाद’ नाम से वर्ष में एक एवं दो अंक प्रकाशित करता है।
संस्थान का भौगोलिक क्षेत्रफल काफी बड़ा है। इसका इतिहास केवल शिक्षण-प्रशिक्षण से ही नहीं जुडा है, बल्कि यहां अनेकों शिक्षा शास्त्री समाजसेवी, स्वतन्त्रता-संग्राम सेनानी तथा शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोग रहे है । जैसे – मुंशी प्रेमचंद, फिराक गोरखपुरी, पं. विधा निवास मिश्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि । मुंशी प्रेमचंद ने यहीं से ‘ईदगाह’, ‘दो बैलों की जोड़ी’ आदि ख्यातिलब्ध कहानियाँ लिखी। संस्थान पुराने बैरेक्स में ही चलता है। 12 वीं पंचवर्षीय योजनाओं (2012-2017) में नये भवन एवं कक्षा-कक्ष इत्यादि की मांग की गयी है।
वर्ष 1993 में असितत्व में आया जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की पहली प्राचार्य श्रीमती राजेश्वरी कुमारी (प्रभारी) 17.07.1993 से 30.06.1995 तक कार्यरत रही। तत्पश्चात कुमारी उषा श्रीवास्तव (प्रभारी), श्री सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह, श्रीमती कमला देवी यादव, श्री श्याम नारायण राम, श्री सदाशिव प्रसाद गुप्त, डा. व्यास मिश्र, श्री बाके सिंह, श्रीमती गायत्री मिश्रा, श्रो ओमदत्त सिंह, श्रीमती शांति जैसवार, श्रीमती मृदुला आनंद, श्री के.के. शास्त्र, श्री संजय सिन्हा, सुश्री विमला शास्त्री, श्री जावेद आलम आजमी, डा. इशितयाक अहमद, श्री रामधनी राम, सुश्री उर्मिला चौधरी, श्री रविन्द्र सिंह , विमला चतुर्वेदी है। संस्थान एक बेहतर शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान है।
देश -विदेश में अपनी सेवाऐं दी है तथा समाज में एक बेहतर शिक्षक के रूप में समय-समय पर अपने आप को प्रमाणित किया है। अनेंकों अच्छे कार्यों हेतु महामहिम राज्यपाल महोदय, महामहिम राष्ट्रपति महोदय तथा अन्य के द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान मिला है।
गोरखपुर में डायट कार्यालय परिसर में शिक्षा विभाग का पुराना भवन है। वर्तमान समय में यहां 50 की संख्या में लोगों का कब्जा है। विभाग के अधिकारी प्रतिदिन इधर से आते-जाते हैं लेकिन उनका ध्यान इस ओर नहीं है।गोरखपुर में डायट कार्यालय परिसर में अधिकारियों की आंख के सामने अवैध बस रही है। पहले शिक्षा विभाग के उक्त भवन में एक कर्मचारी का कब्जा था। अब इसमें बाहरी लोगों ने अपनी बस्ती बसा ली है। शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रतिदिन इधर से आते-जाते हैं, लेकिन वो इस संबंध में आंखें मूंदे जान पड़ते हैं।बढ़ती जा रही अवैध बस्तियों की संख्या
शहर में अवैध बस्तियों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजघाट, अमरुदतानी, ट्रांसपोर्ट नगर, तारामंडल बाइपास रोड, चिड़ियाघर के पास, पैडलेगंज, रेलवे स्टेशन रोड समेत अन्य जगहों पर बाहर से आए लोगों ने बस्ती बसा रखी है। इन सभी बस्तियों को बसाने के पीछे हर जगह कोई न कोई ऐसा व्यक्ति है जो इन लोगों को बसाकर हर माह उनसे एक से तीन हजार रुपये किराए की वसूली करते हैं। साथ ही किसी भी समस्या पर उसका समाधान भी करवाते हैं। ऐसे लोगों में कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
अब डायट कार्यालय परिसर में खाली पड़े शिक्षा विभाग के एक भवन में कुछ बाहरी लोग अवैध रूप से नई बस्ती बसाना शुरू कर दिया है। बातचीत के दौरान रह रहे लोगों ने अपना पता सिकरीगंज थाना के भीता गांव बताया। क्या करते हैं के जबाब में बताया कि महिलाएं मांगने का काम करती हैं तो पुरुष मजदूरी। किसने बसाया के जबाब में कहते हैं, खाली था इसलिए यहां रहने लगे। यद्यपि बोलचाल और भाषा से इनके द्वारा बताया जाने वाला इनका पता संदिग्ध लगने लगता है।दो और भवनों में कर्मचारियों का कब्जा
इसी परिसर में दो और भवन खाली हैं। इसमें शिक्षा विभाग के तीन से चार कर्मचारी रहते है, जबकि उनके रहने के लिए यह भवन नहीं है। वहीं शिक्षा विभाग ने इन भवनों को खंडहर घोषित कर रखा है।क्या कहते हैं अधिकारी
डायट प्रभारी प्राचार्य अभिषेक ने बताया कि कौन है कहां से आए हैं। इसकी जानकारी नहीं है। उन्हें होली के बाद हटवाया जाएगा। नहीं हटने पर पुलिस की मदद ली जाएगी। उन्हें हटाने के लिए दो, तीन बार पूर्व प्राचार्य ने प्रशासन को पत्र लिखा था।