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वेद प्राचीन काल के प्रमाणित ग्रंथ है

दिनांक 01.03.2023

दिनांक 01.03.2023 गोरखपुर। ’’वेद दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ है। वेद ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुनाए गए ज्ञान पर आधारित है इसीलिए इसे श्रुति कहा गया है। सामान्य भाषा में वेद का अर्थ होता है ज्ञान। वेद पुरातन ज्ञान विज्ञान का अथाह भंडार है। इसमें मानव की हर समस्या का समाधान है। वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम आदि सभी विषयों से संबंधित ज्ञान भरा पड़ा है।’’ उक्त बातें डाॅ. दयाशंकर विद्यालंकार, आचार्य, योग और भारतीय संस्कृति, भारतीय महावाणिज्य दूतावास न्यूयार्क ने दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में आत्मा और मन विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को इस राष्ट्र के संस्कार और समाज का सचेतक बताया। हमारे विस्तृत धर्मग्रंथ और उपनिषदों में जीवन जीने की कला के साथ संस्कारों के संरक्षण की बात संग्रहीत है।
डाॅ. विद्यालंकार ने मन की 05 अवस्थाएॅ मूढ़, क्षिप्त, विक्षिप्त, एकाग्र और निरुद्ध पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि एकाग्र अवस्था, मन की एक श्रेष्ठ अवस्था है जो मनुष्य को असाधारण बनाने में उतप्रेरक का कार्य करती है। उसके उपरान्त निरूद्ध अवस्था को प्राप्त व्यक्ति चराचर जगत में प्राणि मात्र की मन एवमं भावना को जानने में सक्षम होता है। जो व्यक्ति मन को विचार शून्य अवस्था में रखने में समर्थ होते हैं उसे ही समाधि कहते हैं।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ओम प्रकाश सिंह जी ने कहा कि स्वयं को जानना ही आत्म साक्षात्कार है। स्वयं के बोध होने के बाद ज्ञात होता है कि संसार के जिन भौतिक पदार्थो को पाने के लिए पूरा जीवन लगा दिया वास्तव में उनका मूल्य कुछ भी नहीं है। मूल्यहीन वस्तुओं की पाने की चाहत हमारी अज्ञानता को दर्शाता है।
उन्होंने सुख और दुःख में अंतर करते हुए कहा अनुकूल वेदना ही सुख है और प्रतिकूल वेदना ही दुख है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार जी ने महाविद्यालय के शिक्षक डॉ नीतीश शुक्ला, भौतिक विज्ञान विभाग एवं डॉ पवन कुमार पाण्डेय, कम्प्यूटर विभाग को सामाजिक कार्यों में सहयोग प्रदान करने हेतु अपनी संस्था पतंजलि वेदनीडम योग संस्थान, हरिद्वार, उत्तराखंड द्वारा उत्कृष्ट समाज सेवा सम्मान से सम्मानित किया।
कार्यक्रम की प्रस्ताविकी एवं संचालन डाॅ. नितीश शुक्ला तथा आभार ज्ञापन प्रो. परीक्षित सिंह ने किया। उक्त कार्यक्रम में प्रो. धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डाॅ. सुरज शुक्ला, श्री हरिशंकर गुप्ता, श्री अरविन्द तिवारी, डाॅ. अरविन्द मौर्य, डाॅ. संजीव सिंह, श्री मुदित दुबे, डाॅ. अभय कुमार मालवीय, श्री विकास पाठक विज्ञान संकाय की सभी छात्र/छात्राएॅ उपस्थित रहें।
उक्त जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डाॅ. शैलेश कुमार सिंह ने दी।

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