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बलिया न्यूज – प्राचीन और पौराणिक है, बलिया के मां ब्राह्मणी का मंदिरदुर्गा सप्तशती व मार्कण्डेय पुराण में मे मां ब्राह्मणी की महिमा वर्णित है।

यह मंदिर जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर हनुमान गंज के निकट स्थित है। यह बलिया जिले के लोगो के प्रमुख आस्था का केन्द्र है। यहां नवरात्रि में काफी भीड़ रहती है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से जो मांगा वो पूरा हो जाता है। दुर्गा सप्तशती व मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है कि भवन राजाओं से हारकर राजा सूरथ ने शिकार खेलने के बहाने सैनिकों के साथ निकल गए। और आज जहां यह मंदिर स्थित है वहा पहले जंगल था वही रुके और सैनिकों को पीने के लिए पानी लाने के लिए बोला। सैनिकों ने पास स्थित सरोवर से पानी ला कर राजा को दिए। युद्ध में घायल राजा के शरीर के कई हिस्सों से घाव से मवाद निकल रहा था। जब वो पानी का स्पर्श किए तो उस हिस्से का घाव और मवाद ठीक हो गया। जिससे वे तुरंत सैनिकों को उस सरोवर के पास ले जाने के लिए बोले तथा उस सरोवर में जाकर छलांग लगा दी। जिससे उनके शरीर का पूरा घाव सही हो गया। जिसके बाद राजा ने सोचा कि निश्चय ही यह स्थान कोई पवित्र स्थान है। उन्होंने अपने सैनिकों को भेज दिए। और विचरण करते हुए पास स्थित महर्षि मेधा के आश्रम में गए और विचरण करने लगे। कुछ दिन बाद वहा समाधि नामक वैश्य आया जिसे घर वालो ने धन के लिए घर से निकाल दिए थे। दोनो ने मेधा ऋषि के आश्रम में गए तो ऋषि ने उन्हें आदि शक्ति देवी की उपासना करने को कहा। दोनो ने मिलकर उपासना की जिससे प्रसन्न होकर मां ब्राह्मणी देवी अवतरित हुई और दोनो की मनोकामनाएं पूर्ण की। जिसके बाद राजा सुरथ के तपोस्थली सुरहा के नाम से विख्यात हुआ। राजा सूरथ ने जिस सरोवर में उनका घाव ठीक हुवा था उस सरोवर को एक नाले का निर्माण कराकर गंगा नदी में मिलवाया था । उस नाले का नाम राजा के कष्ट दूर होने के कारण कष्ठहल नाला पड़ा। जो आज कटहल नाला से प्रसिद्ध है।
बलिया जिले के लोगो का मानना है कि मां ब्राह्मणी देवी बलिया जिले के वीर लोरिक की पुज्यमान देवी थी। युद्ध में वो वीर लोरीक और सवरू की सहायता करती थी जो लोरकी विधा मे आज भी गाया जाता है। बताया जाता है कि एक बार वीर लोरिक ने अपने आराध्य देवी को प्रसन्न करने के लिए 1000 बकरे की बलि दे दी तभी मां ने उन्हें दर्शन नहीं दिया जिसके बाद उन्होंने अपने तलवार से अपनी जांघ को फाड़ दिया जिसके बाद मां ब्राह्मणी ने प्रकट हुई। और उन्हें मन वांछित वरदान दिया।आज भी वीर लोरिक की प्रतिमा मां ब्राह्मणी देवी के मंदिर के निकास द्वार पर स्थित है।
संवाददाता/ प्रभारी
जी न्यूज बलिया

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