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विश्वविद्यालय की प्रतिभा का सही दिशा में प्रयोग की जरूरतः राज्यपाल

अंकित दूबे (ब्यूरो चीफ)जौनपुर

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में विश्वविद्यालय का 28 वां दीक्षांत समारोह रविवार को मनाया गया।
इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय में प्रतिभा की कमी नहीं बस इन्हें प्रेरणा देकर सकारात्मक दिशा में इनकी ऊर्जा का उपयोग करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी संसाधन होने के बाद भी नैक मूल्यांकन से विश्वविद्यालय घबराते थे लेकिन राजभवन ने इसे जरूरी किया और सहयोग और ट्रेनिंग देकर उनके संसाधनों को सिस्टमैटिक रूप से बनाकर ए डबल प्लस की श्रेणी में पहुंचाया। प्रदेश के सात और एक कृषि विश्वविद्यालय ए डबल प्लस की श्रेणी में हैं। कहने का तात्पर्य है कि मानव में संकल्प शक्ति का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नैक मूल्यांकन के कई फायदे हैं ए डबल प्लस पाने वाले विश्वविद्यालयों को 100 करोड़ रूपये बाकी विश्वविद्यालय को 20 करोड़ की धनराशि दी गई है। उन्होंने कहा कि नैक प्रेक्टिस से विश्वविद्यालय के ढांचे में बेहतर परिवर्तन आया है। अब राजभवन का जोर एनआईआरएफ पर है। इस मूल्यांकन और रेटिंग से विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र और मेधावी छात्र आएंगे और यहा के विद्यार्थियों का विदेश जाने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य आपके सामर्थ्य से बढ़ेगा हर चुनौती एक नए अवसर लेकर आती है गुजरात का कच्छ इसका उदाहरण है सरकार के सतत प्रयास से आज गुजरात की स्थिति बदल गई है वहां विदेशी कंपनियां निवेश कर रही है। उनका मानना है कि आज का युग तकनीक का युग है। इसका उपयोग जन कल्याण के हित में होना चाहिए विनाश के लिए नहीं दुनिया में जो कुछ अच्छी और नई चीज हो रही है उससे हमें जुड़ने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने वन नेशनल वन इलेक्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे देश की आर्थिक बचत होगी। केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब हमारी तैयारी अंतरिक्ष पर है। अंतरिक्ष के पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय में शामिल करना चाहिए। एमओयू साइन पर उन्होंने कहा की दोनों के बीच गतिविधियां भी अच्छी हो तभी इसका मतलब है। उन्होंने पूर्वांचल विश्वविद्यालय के खेलकूद की तारीफ करते हुए कहा कि खेल के क्षेत्र में अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं इससे और भी अच्छा करने के लिए और अधिक से अधिक गोल्ड मेडल लाने के लिए और भी अच्छे कोच की जरूरत है। उन्होंने आंगनबाड़ी को संसाधनयुक्त करने की योजना पर जोर दिया। कहा कि इससे वहां पढ़ने वाले गरीब छात्रों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी से लेकर विश्वविद्यालय तक एक सेतु बनाकर काम करें ताकि शिक्षा का विकास सकारात्मक दिशा में हो सके।

विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि स्वर्ण पदक पाने वालों में जुनून होता है लेकिन उसके पीछे अभिभावक और गुरु के समर्पण को भी नहीं भूलना चाहिए। शिक्षण संस्थान जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान हमारे शास्त्रों में पहले से ही था जिसका उदाहरण पीपल में ऑक्सीजन की खोज थी। ऋषि अनुसंधान कर मुनि को देते थे और वह समाज में बांटता था। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाणक्य और विवेकानंद के विचार आज भी समसामयिक है शिक्षक और विद्यार्थियों को उनसे सीख लेनी चाहिए जिन्होंने बहुत ही पहले राष्ट्र को सर्वोपरि माना था।

प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि डिग्री और उपाधि लेने के बाद आपका बोझ और बढ़ गया है आपके ऊपर समाज और राष्ट्र का उत्तरदायित्व है इसे पूरा कर आप भारत को विश्व गुरु बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफलता पाने के लिए संघर्ष जरूरी है जितना बड़ा लक्ष्य होगा उतनी बड़ी चुनौती सामने होगी। हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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